By: Varchasvnews
18-05-2018 08:27

भोपाल। प्रदेश में नियमों को दरकिनार कर आवासीय कॉलोनियों में भूखंड का उपयोग परिवर्तन करने के मामलों से निपटने के लिए सरकार अलग से नियम बनाएगी। नए पट्टा नवीनीकरण नियम से भोपाल, इंदौर सहित अन्य शहरों में सहकारी गृह निर्माण संस्थाओं को आवंटित जमीन के नवीनीकरण के मामले उलझे हुए हैं।

दरअसल, नए नियमों में यह साफ नहीं है कि नवीनीकरण संस्था को दी गई जमीन का होगा या फिर सदस्यों को बांटे भूखंड का। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए राजस्व विभाग ने भूमि सुधार आयोग को नियम बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। मई अंत या जून के शुरुआती पखवाड़े में नए नियम लागू किए जा सकते हैं।

क्यों पड़ी जरूरत

सूत्रों के मुताबिक प्रदेश के बड़े शहरों में गृह निर्माण सहकारी संस्था बनाकर आवासीय कॉलोनी विकसित की गई हैं। जमीन का पट्टा 30 साल के लिए संस्था को दिया गया। संस्था ने सदस्यों को भूखंड बांट दिए। कुछ सदस्यों ने आवासीय भूखंड का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए नियमों को ताक पर रखकर कर लिया। जब पट्टा नवीनीकरण की बात आई तो नियम विरुद्ध निर्माण पर आपत्ति उठाई गई और जुर्माना मांगा गया। सदस्य इसके लिए तैयार नहीं हुए। इसके कारण पूरी कॉलोनी के पट्टों का नवीनीकरण रुक गया।

रहवासी परेशान- प्रॉपर्टी बिक रही न मिल रहा कर्ज

ऐसा ही एक मामला भोपाल की मध्य रेलवे कर्मचारी सहकारी गृह निर्माण संस्था का भी है। पट्टा नवीनीकरण नहीं होने की वजह से रहवासियों को प्रापर्टी बेचने और कर्ज न मिलने जैसी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसको लेकर संस्था ने राजस्व विभाग से लेकर कमिश्नर व कलेक्टर का दरवाजा खटखटाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्व विभाग ने भूमि सुधार आयोग को इस विषय में नियम तैयार करने का जिम्मा सौंप दिया। नियमों को लेकर उच्च स्तरीय बैठक आठ मई को प्रस्तावित थी, लेकिन कुछ अधिकारियों के भोपाल से बाहर होने की वजह से टल गई।

कमिश्नर-कलेक्टर ने सरकार से मांगा मार्गदर्शन

भोपाल कमिश्नर अजातशत्रु श्रीवास्तव और तत्कालीन कलेक्टर निशांत वरवड़े ने प्रमुख सचिव राजस्व को पत्र लिखकर पूछा था कि गृह निर्माण संस्था को आवंटित जमीन सदस्यों को बंटने के बाद पट्टे का नवीनीकरण किस तरह किया जाए। क्या प्रत्येक भूखंड को अलग आवंटन मानकर नवीनीकरण किया जाए या फिर संस्था को आवंटित जमीन को एक मानकर काम किया जाए। कलेक्टर ने यह भी बताया कि नजूल वृत्त में इस मुद्दे से जुड़े कोई पूर्व उदाहरण नहीं है, इसलिए मार्गदर्शन दिया जाए।

राजस्व के मामलों में तेजी से हो रहा काम: पांडे

राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव अरुण पांडे का कहना है कि राजस्व से जुड़े सभी विषयों पर तेजी से काम हो रहा है। आठ लाख से ज्यादा अविवादित बंटवारा, नामांतरण और सीमांकन के मामलों पर कार्रवाई हो चुकी है। पट्टा नवीनीकरण के नए नियम लागू करके बरसों पुरानी समस्या का समाधान किया गया तो मर्जर और सिंधी विस्थापितों की समस्या का स्थायी समाधान निकला गया। गृह निर्माण संस्थाओं से जुड़े जो मुद्दे हैं, उनका हल भी जल्द ही निकल जाएगा।

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