By: Varchasvnews
23-06-2018 07:19

जम्मू : जम्मू और कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने के बाद राज्यपाल एनएन वोहरा ने राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस को जरूरी कर दिया है. राजभवन द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया है कि जो भी कर्मचारी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम का इस्तेमाल नहीं करेगा, उसको वेतन नहीं दिया जाएगा. राज्यपाल एनएन वोहरा ने अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा की समीक्षा करने के बाद ये फरमान जारी किए. 

बता दें कि 20 जून, बुधवार को राष्ट्रपति ने जम्मू और कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू किया था. राज्यपाल शासन के बाद राज्यपाल एनएन वोहरा ने आज राज्य के लिए कई निर्णय लिए. उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों के साथ अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा की समीक्षा की. समीक्षा बैठक के बाद उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि चिंता की कोई जरूरत नहीं है. सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहेगी. 

इसके अलावा उन्होंने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस को अनिवार्य बना दिया है. उन्होंने कहा कि जो भी कर्मचारी बायोमेट्रिक के लिए अपना रजिस्ट्रेशन नहीं कराएगा, उनका वेतन रोक लिया जाएगा.

इससे पहले उन्होंने शुक्रवार को सभी दलों की एक बैठक बुलाई. इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के प्रमुख जीए मीर, बीजेपी नेता सत शर्मा समेत अन्य दलों के नेता भी मौजूद थे. बैठक से पहले पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल से राज्य के हालात पर चर्चा की. 

विजय कुमार बने राज्यपाल के सलाहकार
भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी के. विजय कुमार को राज्यपाल एनएन वोहरा का सलाहकार नियुक्त किया गया है. विजय कुमार 1975 बैच के तमिलनाडु काडर के आईपीएस अधिकारी रहे हैं. वह हाल तक केंद्रीय गृह मंत्रालय में वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार के पद पर थे. उन्हें 1998 और 2001 के दौरान सीमा सुरक्षा बल के महानिरीक्षक के तौर कश्मीर घाटी में कार्य करने का अनुभव है. वह 2010 और 2012 के दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के प्रमुख भी रह चुके हैं. इसके बाद उन्हें गृह मंत्रालय में वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया था. 

बता दें कि जम्मू और कश्मीर की शासन व्यवस्था अब वहां के राज्यपाल एनएन वोहरा के हाथों में है. बीजेपी द्वारा पीडीपी गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लिए जाने के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. तीन साल चली सरकार के बाद कोई भी दल नई सरकार के गठन के लिए सामने नहीं आया. इसके बाद राज्यपाल एनएन वोहरा ने राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजकर राज्य में राज्यपाल शासन लगाने की अपील की थी. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्य के सभी हालातों पर विचार-विमर्श करने के बाद 20 जून को राज्यपाल शासन लगाने के आदेश जारी किए थे.
 

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