लोकायुक्त और उप लोकायुक्त के पास होने वाली शिकायतों और जांच संबंधी मामलों में प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अधीनस्थ अफसरों को भेजने पर जीएडी ने सख्ती के संकेत दिए हैं। जीएडी से लोकायुक्त कार्यालय ने इसको लेकर नाराजगी जताई थी कि शिकायतों और जांच के संबंध में बुलाए जाने पर राजधानी में पदस्थ सीनियर अफसर खुद नहीं जाते हैं और ऐसे अफसरों को भेजते हैं जिन्हें या तो पूरे मामले की जानकारी नहीं होती है या फिर वे संबंधित मामले में कार्रवाई को लेकर निर्णय कर पाने में सक्षम नहीं होते हैं। इसके बाद जीएडी ने इसको लेकर सभी विभागों को लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश जारी किए हैं।
सभी विभागों, विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को लिखे पत्र में जीएडी ने कहा है कि किसी शिकायत या जांच के संबंध में लोकायुक्त या उपलोकायुक्त के समक्ष हाजिर होने के मामले में लापरवाही का मामला संज्ञान में लाया गया है। अधिकारी ऐसे मामलों में अपने अधीनस्थ ऐसे कनिष्ठ अधिकारी जैसे अनुभाग अधिकारी या कर्मचारी को भेज देते हैं, जिन्हें संपूर्ण मामले की जानकारी नहीं होती है और ऐसे मामलों में कार्यवाही के लिए वे प्रतिबद्धता भी नहीं जता पाते हैं।
इसलिए इन हालातों को देखते हुए अब जिम्मेदार अधिकारी किसी शिकायत या जांच के संबंध में लोकायुक्त और उपलोकायुक्त के समक्ष हाजिर होने का निर्देश मिलने पर खुद ही जाएंगे। अगर किसी कारणवश वे खुद नहीं जा पाते हैं तो उन्हें यह तय करना होगा कि राज्य सरकार की ओर से अवर सचिव से नीचे कैडर का कोई अधिकारी जो प्रकरण से पूरी तरह से परिचित हो, वह ही उनकी अनुपस्थिति में लोकायुक्त या उपलोकायुक्त के समक्ष उपस्थित होगा। विशेष परिस्थितियों में अगर विभाग में अवर सचिव की पदस्थापना नहीं है तो ऐसी स्थिति में अनुभाग अधिकारी या प्रभारी अनुभाग अधिकारी को हाजिर होने के लिए कहा जा सकेगा।
12 मार्च को लोकायुक्त ने लिखी थी जीएडी को चिट्ठी
लोकायुक्त संगठन कार्यालय ने 12 मार्च 2025 को लोकायुक्त या उपलोकायुक्त की जांच से संबंधित मामलों में बुलाए जाने पर आधी अधूरी जानकारी के साथ हाजिर होने वालों को लेकर जीएडी को चिट्ठी लिखी थी और इस मामले में जिम्मेदार अफसरों को ही भेजने के लिए कहा था। इसके बाद जीएडी ने यह निर्देश जारी किए हैं।