राजधानी में 20 करोड़ रुपए की लागत से 1.8 किमी लंबी जेके रोड तो बनकर तैयार है, लेकिन इसके दोनों ओर फुटपाथ, नाली निर्माण और डिवाइडर का काम अब अधूरा है। निर्माण कार्य की गति धीरे होने से ऐसा लग रहा है कि 30 अप्रैल डेड लाइन तक काम पूरा नहीं हो पाएगा। इस दौरान यहां कार्य कर रहे इंजीनियर और कर्मचारियों की लापरवाही भी देखी जा रही है।
नाली निर्माण के लिए पहले पेड़ों की कटाई की अनुमति नहीं मिली तो 200 मीटर तक छोटे साइज के पाइप डाल दिए। अब अनुमति मिली तो बड़े साइज के पाइप डालने के निर्देश दिए तो फिर से खुदाई शुरू हो गई। ऐसे में काम में लगातार देरी होती जा रही है। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण कार्य में बरती जा रही लापरवाही से लोग परेशान हैं। रात में हादसे का खतरा बढ़ जाता है। यह सड़क कई जगहों से टूटी भी है। वहीं, निर्माण कार्य की डेड लाइन 30 अप्रैल है, ऐसे में डेढ़ किलोमीटर तक फुटपाथ, नाली और डिवाइडर के साथ लाइट का काम होना मुश्किल है।
बढ़ गई लोगों की परेशानी
जेके रोड से रोजाना एक लाख से अधिक लोग आवाजाही करते हैं। वहीं हल्के और भारी वाहनों का दबाव भी रहता है। ऐसे में जगह-जगह खुदाई और रोड पर बिखरी निर्माण सामग्री कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसके बाद भी जिम्मेदार अफसर यहां सुरक्षा के इंतजाम में लापरवाही बरत रहे हैं।
1.8 किमी रोड के दोनों तरफ खुदाई से हादसे का खतरा, सुरक्षा के इंतजाम भी नहीं; परमिशन मिल गई
30 अप्रैल तक काम पूरा करना है। पहले पेड़ काटने की अनुमति नहीं मिली थी, इसलिए छोटे पाइप डाल दिए गए थे। अब दो पेड़ों को काटकर बड़े पाइप डाले जाएंगे। यहां जगह नहीं है, इसलिए परमिशन लेकर दो पेड़ों को काटा जाएगा। आरपी गुप्ता, इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी
रोड के दोनों तरफ कई दिनों से खुदी है नाली, रेत-गिट्टी फैली है
जेके रोड पर चल रहे निर्माण कार्य के चलते यहां बीच सड़क पर ही बड़ी-बड़ी मशीनें रखी गई हैं, जिससे यहां से निकलने वाले वाहन चालक हादसे का शिकार हो सकते हैं। बता दें कि गोविंदपुरा की ओर से जेके रोड पर भारी वाहनों का आवागमन लगा रहता है, ऐसे में सड़क के डिवाइडर और दोनों ओर ड्रेनज व फुटपाथ निर्माण कार्य के चलते रेत, गिट्टी सड़क पर फैली है। ऐसे में जगह नहीं मिलने पर बाइक चालक रेत व गिट्टी के कारण फिसल जाते हैं।
लागत भी बढ़ गई
पड़ताल में पता चला कि सड़क निर्माण कार्य 20 करोड़ रुपए में होना था। लेकिन इसमें नाली, फुटपाथ, डिवाइडर और इलेक्ट्रिकल वर्क के कारण इसका बजट करीब एक करोड़ रुपए बढ़ गया है। जिसका प्रपोजल विभाग ने भेज दिया है। कुछ दिन पहले काम के दौरान फुटपाथ से हटाई गईं थीं दुकानें, अब फिर लग गईं।
फुटपाथ बना नहीं और लगने लगी दुकानें
निर्माण कार्य के बीच ही यहां निगम ने फुटपाथ से ठेले हटाए थे। कुछ दिनों बाद रोड के दोनों तरफ हाथ ठेले व खाने-पीने की दुकानें फिर लगने लगी हैं। डेढ़ किलोमीटर की इस सड़क पर करीब 100 से ज्यादा गुमठियां और हाथ ठेले खड़े हैं। कहीं-कहीं तो यह भी देखा जा रहा है कि फुटपाथ पर बजरी, रेत पड़ी है और उसके ऊपर मटके एवं गुमठियां रखी हैं। ऐसे में निगम का अतिक्रमण अमला इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
इस रोड के दोनों ओर नाली व फुटपाथ बनाने के लिए पहले पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं मिली थी। इस कारण छोटे साइज के पाइप नाली में डाल दिए थे। अब दो पेड़ काटने की अनुमति मिली तो छोटे पाइप निकालकर बड़े पाइप डालने के निर्देश दिए। इस कारण दोबारा नाली खोदी जा रही है। बड़े पाइप डालने के लिए यहां वर्षों पुराने दो पेड़ों को भी काटने की तैयारी चल रही है।