
भोपाल। सीसीटीवी या बॉडी वॉर्न कैमरों की वीडियो फुटेज में संदिग्ध की सटीक पहचान करना हो या फिर अन्य संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना, एआइ आधारित फेशियल रिकग्नीशन सिस्टम व सर्विलांस सिस्टम के माध्यम से यह काम आसान हो जाएगा।
प्रदेश में पुलिस आरक्षकों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में एआइ के विभिन्न तरह से उपयोग के लिए ट्रेनिंग मॉड्यूल जोड़ने की तैयारी है। इसी तरह से गोली चलाने की वर्चुअल ट्रेनिंग सहित दो अन्य प्रस्ताव भी हैं।
पुलिस आरक्षकों के वर्ष 2025 के बैच में ये नए मॉड्यूल शामिल किए जा सकते हैं। अभी इस बैच के चयन की प्रक्रिया चल रही है। इसी वर्ष मई तक इनकी ज्वाइनिंग कराने की तैयारी है। पुलिस मुख्यालय की प्रशिक्षण शाखा ने डीजीपी को यह प्रस्ताव भेजा है, जिसे शीघ्र ही स्वीकृति मिलने की आशा है।
प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में जो चार नए विषय जोड़ने या बदलने की तैयारी है, उसमें मौजूदा 'कंप्यूटर अवेयरनेस और साइबर सिक्योरिटी' कोर्स में एआइ को शामिल करना, आउटडोर ट्रेनिंग में एआइ का इस्तेमाल, वर्चुअल फायरिंग सिम्युलेटर और डिजिटल सैंड माडल शामिल हैं।
दरअसल, पुलिस को आज के समय की चुनौतियों को समझने और उनसे निपटने की दृष्टि से तैयार किया जा रहा है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण नवीनतम तकनीक है। इस दृष्टि अभी प्रशिक्षण ले रहे वर्ष 2023 के बैच में भी साइबर अपराध सहित कई विषय जोड़े थे।
अब हर क्षेत्र में एआइ के बढ़ते उपयोग की दृष्टि से इसे प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रमुखता से शामिल किया जा रहा है। इसकी बड़ी वजह यह भी है कि अपराधी भी अपराधों में एआइ का उपयोग कर रहे हैं।
एआइ का उपयोग प्रदेश के सभी सात पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों (पीटीएस) में दिए जा रहे प्रशिक्षण में 'कंप्यूटर अवेयरनेस और साइबर सिक्योरिटी' शामिल है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षुओं को साइबर धोखाधड़ी के मामलों से निपटने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है।
अब इसमें एआइ को शामिल किए जाने के बाद पुलिस आरक्षक व अन्य संवर्ग के प्रशिक्षु सर्विलांस सिस्टम (निगरानी व्यवस्था) और फेशियल रिकग्नीशन तकनीक में दक्ष हो सकेंगे। फेशियल रिकग्नीशन पुलिसिंग टूल्स वीडियो, इमेज और ऑडियो एनालिसिस के माध्यम से संदिग्धों की पहचान करने में मदद कर सकते हैं।
अभ्यास (ड्रिल) में हिस्सा लेने वाला प्रशिक्षु अपनी गलतियां खुद नहीं देख पाता। ड्रिल मास्टर ही उसे गलतियां बताता और सुधरवाता है। अभ्यास और आउटडोर ट्रेनिंग में एआइ का उपयोग शुरू होने के बाद प्रशिक्षु अपना अभ्यास खुद देख पाएंगे। जैसे एआइ उन्हें सही मुद्रा (पोस्चर) के बारे में बताएगा।
अगर कभी कानून-व्यवस्था से जुड़ी कोई समस्या पैदा होती है, तो भीड़ के बीच बंदूक चलाने के प्रशिक्षण में यह बहुत ही आधुनिक कदम है। अभी, प्रशिक्षु मैदान में फायरिंग की प्रैक्टिस करते हैं। कभी-कभी यह उनके लिए सुरक्षित नहीं होता और प्रदर्शन भी आशा के अनुरूप नहीं होता।