इसके साथ ही चीन की भी इस इलाके पर नजर है। ढाका में चीनी राजदूत ने राजनीतिक दलों के बीच सक्रियता बढ़ा दी है। सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने इसी सप्ताह बीजिंग में जिनपिंग से मुलाकात की है। बीएनपी और जमात के नेता पहले ही बीजिंग का दौरा कर चुके हैं और अब नवगठित एनसीपी को भी आमंत्रित करने की कोशिशें चल रही हैं। चीन इन सबका फायदा उठाने की कोशिश करेगा। ऐसे में देखना होगा कि भारत ट्रंप-मोदी की दोस्ती का इस्तेमाल ढाका में अपने रसूख को फिर से पाने के लिए कैसे करता है। इन परिस्थितियों में बांग्लादेश की सेना की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।