देखो, मैंने एक सपना देखा

Updated on 26-11-2022 01:19 AM
 - अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

आज सुबह जब नींद खुली, तो कुछ मिनटों तक दहशत में रहा, पसीने से तर-बतर हो चुका था। आतंकवाद की दहशत मानो सपने से हकीकत का रूप ले चुकी हो। एक देश के आतंकी हमले ने दूसरे को तहस-नहस कर दिया। हर तरफ लाशों के ढेर बिछाने और खून के कतरे से देश की धरती को रंगने में आतंकियों को थोड़ी भी रहम नहीं आई, लेकिन सरकार ने कुछ रेहमत दिखाई। फिर क्या देखता हूँ कि सभी देशों ने तालमेल बैठाकर रक्षा बजट पर होने वाले करोड़ों रुपयों के खर्चों पर विराम लगाने का फैसला लिया। इस फैसले में कहा गया कि हम ऑफेंसिव होने के बजाए डिफेंसिव होने पर काम करेंगे। यानि किसी दूसरे देश पर हमला करने की वजह अब हम न होंगे। खैर, यह एक सपना था। लेकिन यदि मेरा सपना सच हो जाए, तो मुझे लगता है कि दुनिया में शांति ही शांति हो जाए। कितना अच्छा हो कि दहशत का पेड़ बनने से पहले आतंक की तमाम जड़ें देश में ही काट दी जाएँ और इन्हें पनपने ही नहीं दिया जाए। यहाँ मुझे वह उदाहरण याद आया, जब एक साथ कई तीलियाँ कतार में बिछी होती हैं। आग लगने पर एक से दूसरी और फिर तीसरी चपेट में आ जाती है। जैसे ही बीच में से एक तीली को पीछे खींच दिया जाता है, आग थम जाती है। बस ऐसे ही यदि सभी देश अपने कदम पीछे खींच लें, तो आतंक पर विराम लग जाएगा।   

रूस-यूक्रेन और तालिबान-अफगानिस्तान विवाद यदि आतंक का रूप नहीं लेता और सुलह कर लेता, तो शायद ये देश जनहानि और संपत्ति के नुकसान से बच जाते। ऐसे ही मुझे भारत के वो हमले याद आ गए, जिससे देश बार-बार आहत हुआ, खासकर वर्ष 2008 में। भारत में सबसे खतरनाक आतंकवादी हमलों में से एक 26/11 का आतंकी हमला 26 नवंबर, 2008 को हुआ था, जब 10 आतंकवादी समुद्र के माध्यम से देश में प्रवेश करने में सफल हुए थे। इसी साल यानि 13 मई, 2008 को लगातार 15 मिनट में हुए नौ बम विस्फोटों से पूरे जयपुर में सदमें की लहर दौड़ गई थी। दसवाँ विस्फोट भी हो ही जाता, यदि अधिकारी 10वें बम को ढूँढने और निरस्त्र करने में असफल रहते। वहीं 30 अक्टूबर, 2008 को असम की राजधानी गुवाहाटी के विभिन्न हिस्सों में 18 विस्फोट हुए थे। 11 जुलाई, 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में प्रेशर कूकर में बम रखकर हुए सात बम विस्फोट भी ध्यान आ गए। 29 अक्टूबर, 2005 को सीरियल बम विस्फोट ने दिल्ली की नींव हिलाकर रख दी थी।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 20 February 2025
-शशिकांत मिश्रभारत की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत में काशी और द्रविड़ क्षेत्र की गहरी जड़ें हैं। काशी, जिसे वाराणसी के नाम से भी जाना जाता है, प्राचीन भारत की सांस्कृतिक…
 26 January 2025
हजारों श्रद्धालुओं के लिए खालसा का अनुकरणीय सेवाभाव बना जनमानस में चर्चा का बिंदुमहाकुंभ अमृत मेला में कोल्हूनाथ खालसा की व्यवस्थाएं एवं उनके द्वारा किए जा रहे पुनीत निस्वार्थ कार्यों…
 07 August 2024
- अतुल मलिकराम (लेखक एवं राजनीतिक रणनीतिकार)भारत के हलचल और महत्वाकांक्षाओं से भरे एक शहर में, आन्या रहती है। आन्या 20-22 साल की एक होनहार बालिका है, जिसने हाल ही…
 07 August 2024
-अतुल मलिकराम (लेखक एवं राजनीतिक रणनीतिकार)आजकल की दिखावे की दुनिया में यह देखना वाकई निराशाजनक है कि मानव स्वभाव कितना उथला हो सकता है। हम अक्सर वास्तविक मायने रखने वाली…
 03 June 2024
 - अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)भारतीय लोकतंत्र के महापर्व के तहत 18वीं लोकसभा चुनावों के परिणामों में अब कुछ ही दिन शेष हैं। 4 जून को ईवीएम में बंद पार्टियों की…
 03 June 2024
प्ले डीएमएफ के फाउंडर अंशुल गर्ग के नाम पहले से ही दो अंतरराष्ट्रीय चार्टबस्टर हैं- गुली माता और यिम्मी यिम्मी । इसके अलावा ज़ालिमा के अनाउंसमेंट के साथ इस सूची…
 24 May 2024
- अतुल मलिकरामलोकसभा चुनाव 2024 के पांच चरणों का मतदान पूरा हो चुका है, हालांकि अब तक हुई 429 सीटों पर औसत मतदान लगभग 57.44 प्रतिशत रहा है। खुद चुनाव…
 29 April 2024
कृष्णमोहन झा/परम वैभव संपन्न राष्ट्र के निर्माण हेतु समर्पित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर यूं तो अनेक आरोप लगते रहे हैं परंतु संघ ने कभी भी आरोप प्रत्यारोप की राजनीति को…
 22 April 2024
कृष्णमोहन झा/देश के 25 से अधिक भाजपा विरोधी दलों ने गत वर्ष जो इंडिया गठबंधन बनाया था उसमें यूं तो शुरू से ही मतभेद उजागर होने लगे थे परन्तु उस…
Advt.